मुंबई शहर
रात के करीब 9 बज रहे थे। मायानगरी मुंबई अपनी पूरी चमक-धमक के साथ जाग रही थी, लेकिन मरीन ड्राइव की उस सुनसान सड़क पर सन्नाटा पसरा था। तभी उस सन्नाटे को चीरती हुई एक काली 'Rolls Royce Phantom' तूफ़ानी रफ़्तार से आगे बढ़ रही थी। गाड़ी की हेडलाइट्स अंधेरे को चीर रही थीं। अचानक, सड़क के किनारे से एक साया दौड़ता हुआ गाड़ी के ठीक सामने आ गया।
"कच-च-च-च!"
टायरों के घिसटने की तीखी आवाज़ गूँजी और गाड़ी एक झटके के साथ रुक गई। ड्राइवर के माथे पर पसीना आ गया। उसने डरते हुए पीछे वाले 'रियर व्यू मिरर' में देखा। गाड़ी के पीछे वाले केबिन में अंधेरा था, लेकिन वहां बैठी शख्सियत की सर्द निगाहें साफ़ महसूस की जा सकती थीं। वह शख्स कोई और नहीं, हृदयांश वालिया था—बिजनेस जगत का बेताज बादशाह, जिसके लिए वक्त की कीमत खून से भी ज्यादा थी।
हृदयांश ने अपनी कलाई पर बंधी करोड़ों की 'Patek Philippe' घड़ी देखी। उसकी नीली आँखों में गुस्सा और नफरत साफ़ झलक रही थी। उसका कीमती समय बर्बाद हुआ था, और हृदयांश वालिया को अपनी जिंदगी में 'रुकावट' शब्द से सख्त नफरत थी।
ड्राइवर बिना देर किए गाड़ी से बाहर निकला और उस लड़की पर चिल्लाया, "ऐ लड़की! अक्ल घास चरने गई है क्या? मरना है तो कहीं और जाकर मरो, मेरी ही गाड़ी मिली थी क्या अपनी जान देने के लिए? जानती भी हो अंदर कौन बैठा है?"
वह लड़की, जो डर के मारे कांप रही थी, उसने अपने दोनों हाथ ड्राइवर के सामने जोड़ दिए। उसकी सांसें फूल रही थीं और आँखों में खौफ था। वह रुंधे हुए गले से बोली, "भइया... भगवान के लिए मेरी मदद कीजिए... वो लोग मुझे मार डालेंगे... प्लीज!"
गाड़ी के शीशों के पीछे से हृदयांश यह सब देख रहा था। उसका गुस्सा सातवें आसमान पर था। उसने दरवाज़ा खोला और अपनी लंबी कद-काठी के साथ बाहर निकला। 6 फीट 30 साल का वह गबरू जवान, जिम में तराशा हुआ बदन, और ब्लैक ब्रांडेड थ्री-पीस सूट में वह साक्षात यमराज का कोई हैंडसम अवतार लग रहा था।
उसने ड्राइवर को हटने का इशारा किया और अपनी उस मशहूर 'सर्द आवाज' में बोला, जिसे सुनकर अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाते थे, "अगर तुम्हारा यह नाटक खत्म हो गया हो... तो मेरे रास्ते से हटो। मुझे देर हो रही है।"
उसकी आवाज़ इतनी ठंडी थी कि वह लड़की और ड्राइवर दोनों ही अपनी जगह जम गए। हृदयांश ने अभी तक उस लड़की का चेहरा नहीं देखा था क्योंकि उसकी पीठ उसकी तरफ थी। वह बस उसे एक साधारण मुसीबत समझ रहा था।
लड़की जैसे ही हृदयांश की तरफ पलटने वाली थी, तभी अंधेरे से निकलकर चार-पांच भारी-भरकम गुंडे वहां आ धमके। उनके हाथों में लोहे की रॉड और चैन थी। उनमें से एक गुंडा, जो उनका लीडर लग रहा था, भद्दी हंसी हंसते हुए बोला, "अच्छा... तो तू यहाँ छिपी है? भाग बानी भाग... देखते हैं आज तुझे हमसे कौन बचाता है। अगर चुपचाप 'रोहित सर' के पास चलेगी तो शायद जान बच जाए, वरना हम तुझे घसीटते हुए ले जाएंगे और फिर जो होगा, उसकी जिम्मेदार तू खुद होगी।"
'बानी'... यह नाम सुनते ही हृदयांश के कानों में जैसे कोई मधुर धुन गूँजी। वह लड़की, जिसे गुंडे बानी कह रहे थे, धीरे से पलटी और हृदयांश की तरफ देखा।
जैसे ही हृदयांश की नज़र बानी पर पड़ी, वक्त जैसे वहीं ठहर गया। हृदयांश की वो पत्थर जैसी नीली आँखें बानी के मासूम चेहरे पर टिक गईं। बानी... करीब 23 साल की, 5 फीट 2 इंच का कद, और उसका रंग... जैसे दूध में गुलाब की पंखुड़ियां घुली हों। उसकी झील सी गहरी काली आँखों में डर के आंसू तैर रहे थे। उसकी सुराही जैसी गर्दन और कमर तक लहराते काले बाल... लेकिन सबसे अजीब बात यह थी कि उस जवान लड़की ने एकदम सफ़ेद सूती साड़ी पहन रखी थी। उसकी मांग सूनी थी, माथा खाली था और कलाइयों में कोई गहना नहीं था।
हृदयांश ने आज तक हज़ारों मॉडल देखी थी , लेकिन बानी की उस 'सफ़ेद सादगी' ने उसके दिल की धड़कन एक पल के लिए रोक दी। वह बेपनाह खूबसूरत थी, लेकिन उस खूबसूरती पर विधवा’ होने का दर्द हावी था।
बानी रोते हुए हृदयांश के सामने गिड़गिड़ाई, "आप... आप जो भी हैं, प्लीज मुझे बचा लीजिए। ये लोग बहुत बुरे हैं।"
तभी एक गुंडा आगे बढ़ा और बानी के कंधे को छूने की कोशिश करते हुए बोला, "छोड़ इसे लड़की, ये बड़े लोग हमारी बातों में नहीं पड़ते। चल हमारे साथ!"
गुंडे का हाथ बानी को छू पाता, उससे पहले ही एक कड़कती हुई आवाज़ आई। "अगर अपनी सलामती चाहते हो, तो अपना गंदा हाथ पीछे हटा लो।" यह हृदयांश था।
गुंडा हंसा, "अरे वो साहब आप जाइए ये हमारा मामला है हम देख लेंगे आप बीच में मत पड़िए।"
हृदयांश के चेहरे पर एक खौफनाक मुस्कान आई। उसने बिजली की रफ़्तार से उस गुंडे के जबड़े पर एक जोरदार मुक्का जड़ा। "धड़ाक!" गुंडे के मुंह से खून का फव्वारा फूटा और वह दो चक्कर खाकर ज़मीन पर गिर पड़ा। बाकी गुंडे कुछ समझ पाते, उससे पहले ही हृदयांश ने एक-एक करके सबको धूल चटा दी। उसका गुस्सा बानी को छूने की कोशिश करने वालों पर कहर बनकर टूट रहा था।
बानी सहमी हुई यह सब देख रही थी। जब सब गुंडे ज़मीन पर तड़प रहे थे, तब बानी ने पास आकर कहा, "धन्यवाद... आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। आपने आज मेरी जान बचा ली। मैं आपका यह अहसान कभी नहीं भूलूँगी।"
हृदयांश कुछ कहने ही वाला था कि तभी एक कार वहां आकर रुकी। उसमें से एक 26 साल का लड़का निकला—चेहरे पर घमंड और आँखों में नफ़रत। वह रोहित पुरोहित था।
रोहित बानी को देखकर चिल्लाया, "बानी! तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे दुश्मन से मदद लेने की? और मिस्टर हृदयांश वालिया... तुम? मेरे शिकार के बीच में, तुम क्या कर रहे हो?"
हृदयांश की नीली आँखों में अब खून उतर आया था। उसने रोहित का कॉलर पकड़ा और उसे हवा में उठा दिया। "रोहित... अपनी औकात मत भूल। अगर हिम्मत है तो इस लड़की को तू हाथ लगा कर तो दिखा, तुझे इस शहर की मिट्टी भी नसीब नहीं होगी।"
रोहित ने खुद को छुड़ाते हुए कहा, "वालिया! हमारी खानदानी दुश्मनी अपनी जगह है, लेकिन यह लड़की मेरा 'पर्सनल मैटर' है। तुम बीच में मत आओ!"
हृदयांश ने एक 'डेविल स्माइल' दी और अपनी जेब से एक सिगरेट निकालकर सुलगाई। उसने एक लंबा कश लिया और सारा धुआं रोहित के मुंह पर छोड़ते हुए सर्द लहजे में कहा, "बीच में तो मैं आ चुका हूं रोहित पुरोहित, जब तक यह मेरे सामने है, यह किसी की जागीर नहीं है। और अब... यह मेरी सुरक्षा में है। दम है तो छूकर दिखा।"
रोहित पुरोहित गुस्से में बोला, “ हृदयांश वालिया तुम इसका अंजाम नहीं जानते इसलिए, हटो मेरे रास्ते से।”
हृदयांश सर्द लहजे में बोला, “ तेरे जैसे गीदड़ से हृदयांश वालिया कभी नहीं डरता।”
बानी डर के मारे हृदयांश के पीछे छिप गई। उसकी साड़ी का पल्लू हृदयांश के सूट से रगड़ खा रहा था। रोहित जैसे ही आगे बढ़ा, हृदयांश ने उसके पेट पर एक जोरदार लात मारी। रोहित दूर जाकर गिरा।
हृदयांश ने बानी की तरफ हाथ बढ़ाया और कहा, "चलो, मैं तुम्हें घर छोड़ देता हूँ।"
गाड़ी में बैठते समय बानी की सफ़ेद साड़ी का सिरा हृदयांश के हाथ से छू गया। हृदयांश को एक अजीब सा अहसास हुआ—जैसे उस सफ़ेद रंग में कोई बहुत गहरा राज छुपा हो। गाड़ी तेज़ रफ़्तार से निकल गई। पीछे खड़े रोहित ने चिल्लाकर कहा, "हृदयांश वालिया! तुमने आग को हाथ लगाया है। जब तुम्हें पता चलेगा कि यह बानी कौन है और इसका अतीत क्या है... तो तुम खुद इसे अपने हाथों से सजा दोगे!"
गाड़ी के अंदर सन्नाटा था, पर हृदयांश के मन में एक ही सवाल था—"इस सफ़ेद साड़ी वाली लड़की के पीछे रोहित पुरोहित क्यों पड़ा है?"
आखिर क्या दुश्मनी है हृदयांश और रोहित की? रोहित बानी के पीछे क्यों पड़ा है? ये जानने के लिए आप लोग प्यारे प्यारे कमेंट करके बताए, मिलते हैं नेक्स्ट पार्ट में
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